*शुक्र कर रब का,*
*तू अपने घर में है,*
*पूछ उस से जो*
*अटका सफ़र में है!*
*यहाँ बाप की शक्ल नहीं देखी*
*आखरी वक़्त में कुछ लोगों ने,*
*बेटा हॉस्पिटल में और*
*बाप कब्र में है*
*तेरे घर में राशन है साल भर का,*
*तू उसका सोच जो दो वक़्त की*
*रोटी के फ़िक्र में है !*
*तुम्हें किस बात की जल्दी है*
*गाड़ी में घूमने की,*
*अब तो सारी कायनातही सब्र में है!*
*अभीभी किसी भ्रममें मत रहना,मेरे दोस्त*
*इन्सानो की नहीं सुनती आज कल,*
*कुदरत अपने सुर में है!*
💐 🙏🙏💐 ashish