हमारे जीवन का हर क्षण बदलता है,
रिश्ते नाते सब बदलते हैं,
हम सब बदलते हैं,
दुःख के आने और सुख के जाने में,
नहीं बदलता है तो केवल दुख,
और उस दुःख से उठे वो भाव,
जो हमारे भीतर पैठ जमाये बैठा रहता है,
जिसे हम बदलना तो चाहते हैं
लेकिन यह जोंक की भांति चिपका रहता है,
और जिन्दगी के सारे रस को चूसता रहता है