#परिचय
#introduce
परिचय
परिचय सुनूं , या परिचय सुनाऊं
परिचय में क्या क्या, यहां मै बताऊं
परिचय करा दूं , इंसानियत का सबसे
जो सबमें है रहता, छिपी बात सबसे
भूख से तड़पता , प्यास से विकल था
वृद्ध व्यक्ति ऐसा , न उसके पास बल था
कराहता पुकारता , दया की दृष्टि कर दो
हे भाग्य के विधाता , नीर वृष्टि कर दो
हे सूर्य हे दिवाकर , करुणामयी बनो तुम
किरणों को शून्य कर दो , हे चंद्रमा तनो तुम
क्षिण शक्ति हो चुकी है , असहाय हो चुका हूं
इंसानियत ख़तम है , विश्वास खो चुका हूं
इंसानियत बचाने विश्वास को जगाने,
धर्मराज चल पड़े हैं
इंसानियत है सब में यह बात फिर बताने,
प्रभु आज चल पड़े हैं
उदंड एक राही , जाता दिखा वहां से
इंसानियत का परिचय , बढ़ता दिखा वहां से
आंखों से वृद्ध टुक टुक , देखे न मुंह से बोले
राही चला था धुन में , मस्ती में पांव डोले
अचानक रुका फिरा वह , वृद्ध पास आया
क्षमा हे वृद्ध बाबा , विलम्ब ज्ञान आया
सहारा मै बन रहा हूं , आशीष चाहता हूं
इंसानियत बनी रहे , हे जगदीश चाहता हूं
परिचय में ज्योति कहता , प्रकाश ना बुझे यह
जीवित रहे मनुष्यता , विश्वास है मुझे यह
।। ज्योति प्रकाश राय ।।