Hindi Quote in Poem by सुधाकर मिश्र ” सरस ”

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लाख छिपें हम भले, चेहरा बदल - बदल
परिचय कराए वक़्त, सहे कोई न दखल
ऐसे भी लोग हैं यहां, दिखते बहुत सरल
करते वे विष वमन, नफरतों का पी गरल
परिचय स्वयं है उनकी, नपाक़ हर पहल
फितरत है द्रोह उनका, हर नेत्र हो सजल
पहचान खुद बने हम, इरादे हों सब अटल
ये देश है हमारा, कर सके न कोई छल
बुराई का बीज़ बोकर, काटेंगे वो फसल
है खैर नहीं उनकी, न होंगे वे सफल
न देश का हुआ जो, रहा वो क्यूं मचल
आज की तो छोड़ो, उसका न कोई कल
परिचय बताए वक़्त, ज्यों दर्पण दिखाए शक्ल

#परिचय

Hindi Poem by सुधाकर मिश्र ” सरस ” : 111433435
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