Dear ज़िन्दगी
यह ज़िन्दगी हे, कई रंग दिखलायेगी |
कभी नयी नबेली दुल्हन तो कभी
बेबा की सुनी मांग बनजाएगी ||
कभी कान्हा की बांसुरी तो कभी,
नटराज की तीसरी आँख बनजाएगी,
यह ज़िन्दगी हे कई रंग दिखलायेगी |||
कभी गीता का सास्वत सत्य तो कभी,
क़ुरान की पाक इबादत बनजाएगी,
समंदर सी सांत तो कभी नदी सी चंचल बनजायेगी
यह ज़िन्दगी हे कई रंग दिखलायेगी ||||
जुआ सी हे यह ज़िन्दगी, कभी सय कभी मात
देजाएगी, कभी जन्नत कभी जहनुम बनजाएगी
यह ज़िन्दगी हे कई रंग दिखलायेगी....