कोई निगाहों से शिकार करता है
कोई लब्ज़ों से ही घायल कर जाता है
कोई कलम के हर्फों से कमाल करता है
किसी की खामोशी ही क़हर ढाती है
हमने सोचा न था कि कभी इश्क़ हो
इन्हीं लोगों ने कर दिया मजबूर
शिकारी तो हर तरफ थे मौजूद
किसी न किसी जाल में फंसना था जरूर
कब तक बचाये रखते हम अपना वज़ूद .
#Hunt = शिकार