#काव्योसत्व २
शतरंज की बिसात
प्यादे सब से पहले मारे जाते है
उनका काम ही होता है
राजा रानी की रक्षा करते मिट जाना
हाथी, घोड़ो, ऊंटो की कीमती जान बचाना,
खेल तब तक ही चलता है
जब तक राजा है
प्यादे एक कदम ही चल सकते है
वे तिरछे नहीं जाते, लंबी छलांग नही
लगाते, और ना ही राजा के मुहंलगे
घोड़ो से ढाई घर चल सकते है,
इतिहास की कहानियों में,
तमाम तरह की चर्चाओ में और
दूनियाँ की तमाम तहरीरो में
समाचारो में छाऐ रहते है
हाथी, घोड़े, ऊंट और राजा-वजीर,
प्रेम कहानियो से लेकर
विजय गौरव गाथाओ में
राजतंत्र से लेकर लोकतंत्र की
महान ईबारतो में
प्यादे कहीं नहीं मिलते,
वे दब जाते है चीन की दीवारो में,
पिरामिडो के भारों में,
महलो और किलों की बुनियादो में
दंगो और फसादो में
और तमाम तरह के शस्त्रो के वार सहते,
प्यादे बस टिके रहते है अपने एक खाने में
जब तक कि शासन-सत्ता का हाथ आगे बढ़
उन्हे....
कि प्यादे सब से पहले मारे जाते है..
© हरदीप सबरवाल.