लिखते रहे कागज़ों पे दिल के तमाम दर्द,
पर खामोश जुबां को न आवाज दे सके।
भरते रहे तस्वीरों में कई रंग हम मगर,
बेनूर जिंदगी को न अंदाज़ दे सके।
वक़्त के पिंजरे में हम कैद यूं हुए,
सपनों के परिंदों को न परवाज़ दे सके।
बेचैनी हर वक़्त कुछ इस कदर रही,
सुकूँ भरे कुछ गीत न साज दे सके।
बेड़ियों को तोड़ने की कोशिश तो बड़ी की,
पर जिंदगी को न नए रस्मोरिवाज दे सके।
#दिल