# Heart
दिल के दरवाज़े पे साँकल जो लगा रखी थी
खोल दिया उसको अब ,झिर्री बनाई है मैंने
वो जो परिंदों की चूँ चूँ सुनाई देती है
उनकी आवाज़ को ही माप लिया करती हूँ ---
ये जो सन्नाटे बिखरे पड़े हैं सड़कों पर
उनके संदेश हम तक पहुँच रहे हैं अब
मौन की भीतरी ताक़त से रुबरु होना
इन्हीं पलों में आओ समझ ले सारी बातें ----