द्वेष भाव ...
भावनाएं कितने बदलती हैं वेश
किसी से प्रेम और किसी से द्वेष
क्यों ये मन रखता किसी से रोष
क्या है उसकी खता, क्या है दोष
मन में इतना क्यों रखा है काला
क्यों भरा हुआ ज़हर का प्याला
जाने जपे क्यों मन ईर्ष्या की माला
क्यों मनुज ने है घृणा को पाला
ये भीतर भरी गंदगी, मैला सारा
करता है स्वयं का ही मन ख़ारा
नहीं करता कुछ भी शुभ हमारा
सब सुकून चैन का ये है हत्यारा
:- भुवन पांडे
#द्वेष