किसी से द्वेष करके हम उसकी नफरत ही पा सकते है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव हमारे ही भावों पर पड़ेगा, जबकि दूसरा यह जान भी नहीं पाएगा की हम उससे द्वेष क्यों करते है और हम उसके बदल जाने की आस लगाए रहेंगे।
किसी से द्वेष करने से बेहतर है कि हम उससे बात करे और उसके विचारो को समझे, अगर बिना बात किए किसी के विचारो को समझना चाहते है, तो बेहतर होगा उसके लिखो आदि को पढ़ा जाए...
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Abhinav Bajpai लिखित कहानी "अोफिडियोफोबिया"
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#द्वेष