बहुत लिख डालते है हम उस रब के बारे मे कभी मुख़ातिब हुए है क्या ? उसके एक कण से भी|
हम निर्जीव ही तो उसे जैसे दिमाग आदेश दे वैसा मानते है| यदि दिमाग की पकड़ मे वह (ईश्वर) आ जाता तो क्या वह रब कहलाता ? छोटे से कटोरे मे आसमान भरने की कोशिश करते है | उसकी पहचान बता अपराध ही तो करते है | नही कोई शिकायत मुझे की कोई उसकी बात करे ,पर बतायें उतना ही जितना उसे महसूस करे | जिसने दुनिया को स्थापित कर रख्खा ,उसे स्थित करने का हक किसे , हमारा अधिकार है तो केवल धन्यवाद पर हम उन्हे(ईश्वर को) हर पल वही दें | हम रोम-रोम से उसके कर्जदार है सदैव इसको याद रखें|