कुछ तुम कहना,कुछ हम सुनाएंगे
मोहब्बत के गीत मिलकर,
हम यूँ ही गुनगुनायेंगे
उधर से कुछ तुम सुनाना दिल - ऐ- बेकरारी
इधर से हम हाल-ऐ- दिल बताएंगे
मिलकर यूँ ही रोज फोन पर
प्रेम -सागर में डुबकियां लगाएंगे
साथ डूबेंगे रोज इस प्रेम नदी में
हर बार पार हो जायेगें
खोकर एक दूसरे में,
जिंदगी सफर कर जायेगें
न तुम मिलना कभी
न कभी हम मिलने आयेगें
न मिलकर भी एक दूसरे से
प्रेम की एक नई परिभाषा बनायेगें
दूर रह कर भी हमेशा
प्यार करेंगे एक दूसरे से
अपने प्रेम को हम यूँ अमर कर जायेगें