अपने एकान्त से बेहतर मुझे कोई शराब नहीं लगती ।
इसकी ख़ुमारी कभी ख़त्म नहीं होती,एकान्त एक मात्र ऐसी शराब है जो जीवन में होश का मज़ा लाती है । अपने एकान्त को पीकर ही समझा जा सकता है के होश से बड़ी कोई बेहोशी नहीं ।
इस से बेहतर कोई ध्यान भी नहीं लगता मुझे ।
ध्यान सर्वप्रथम खुद को जानने के लिए होना चाहिए,अपनी संभावनाएं जानने के लिए ।
एकान्त आपको अपने करीब लाता है जहाँ आप खुद से संवाद करते हैं ।
और अपने आप से संवाद इंसान तभी करता है जब वो किसी नशे में हो ।
खुद को भूल कर ही खुद को जाना जा सकता है और कुछ भूलने के लिए ही शराब पी जाती है ऐसा कहते है ।.
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बुद्ध ने छक कर पी अपने एकान्त की ये शराब और उनके अनुयायी आज तक उस ख़ुमार में है। एकान्त आपको बुद्ध ही बना देगा ऐसा में नहीं कहता,हाँ पर आपके जीवन और आपकी आत्मा को शुद्ध जरूर बना देगा ।●