हम दिलजलों में
कुछ बाते ही हैं निराली.
एक बेवफा सनम दर्देदिल जख्मो वाली,
न कोई हमदर्द और नही कोई वालि.
भरी हसीनाओ की रंगीन महेफिल,
पर ये जख्मीदिल जिस का हर कोना खाली।
फ़क़त एक धुन गूँजती हैं जलते दिल में,
के चाह कर भी योगी,
फिरसे मोहब्बत न होगी...
पहले वाली.
हम दिलजलों में
कुछ बाते ही हैं निराली...!