तीन अवस्थाएँ होती हैं चेतना की -
जागृति, स्वप्न, सुषुप्ति।
एक चौथी भी होती है - मृत्यु।
मृत्यु चेतना की ही एक अवस्था भर है।
मौत जब छा रही हो,
आध्यात्मिक आदमी कहता है:
बस चेतना बदल रही है,
एक स्थिति से दूसरी।
वो फिर मरता नहीं,
मौत का दर्शक हो जाता है।