नक़ाब हूँ, उस चहरे का जो मुस्कुराया तो सही लेकिन खुलके रोया नहीं गया ।
मनका हूँ , उसे टूटे हुए धागे का
जो बिखरा तो सही लेकिन पिरोया नहीं गया ।
दाग हूँ ,उस कमीज़ का जो लगा तो सही लेकिन धोया नही गया ।
बीज हूँ , उस फ़सल का जिसे ख़रीदा तो सही लेकिन बोया नही गया ।
पहचान हूँ, उस पते की जो मिला तो सही लेकिन जिसको खोया नही गया ।
प्यास हूँ, उस रेगिस्तान की जो सूखा तो सही लेकिन कभी भिगोया नही गया ।
मुसाफ़िर हूँ, उस सफर का जो थका तो सही लेकिन जिससे सोया नहीं गया ।