Hindi Quote in Story by Saroj Prajapati

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#हास्यकर
"सब्जी वाला आया है। सब्जी लेनी है क्या ?"बालकनी में खड़े पति ने आवाज लगाई।
" नहीं रखी है ।" 
" सुधा फ्रूटस वाला खड़ा है नीचे। लेने है क्या!"
" कल ही तो लिए थे जी। रखे हैं अभी।"
 शाम होते ही, "सामान लाना है क्या कुछ!" "नहीं सब है ।"
 सुबह उठते ही "दूध लाना है !"
" अरे कल ही तो 3 लीटर लाए थे।आज चल जाएगा।"
" पीते नहीं हो क्या !" " पीते हैं अब एक दिन में कितना  पी ले।"
" अच्छा तुम झाड़ू लगा देना। पोछा मैं लगा देता हूं।।"

यह सुन मैंने बड़ी हैरानी भरी नजरों से उनकी ओर देखा और कहा
"आप पोछा लगाओगे!"
"तुम तो ऐसे कह रही हो, पहले भी तो करता था ना।"
"पहले तो करते थे लेकिन........?"
"अरे यार यह लेकिन वेकिन छोड़ो। बोर होने से अच्छा है कि घर के दो काम ही करा दी जाए।"

"रहने दो जी सब समझती हूं, मैं आपकी चालाकी।"मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
आप सोच रहे होंगे कितना सहयोगी  हस्बैंड है। तो आप सब की गलतफहमी दूर कर दूं। जनाब यह सब अपनी लॉक डाउन में होने वाली बोरियत दूर करने के लिए कर रहे हैं। वरना इनका हाल दूसरे पुरुषों से कम नहीं।

हां, जब बच्चे छोटे थे तो हर काम में हेल्प करा देते थे। लेकिन जैसे ही बच्चे इनके कंधों तक आए। उन्होंने घर के कामों से संन्यास ले लिया। कुछ भी कहो तो बस उनका एक ही डायलॉग " सारी उम्र मैं ही करता रहूंगा क्या! बच्चे बड़े हो गए हैं। उन्हें भी सिखाओ कुछ। थक जाता हूं, पूरा दिन ऑफिस में काम करते हुए। उम्र भी तो बढ़ रही है मेरी।"

"हां जी , आपकी उम्र बढ़ रही है और मैं तो जवान होती जा रही हूं ! मैं भी कौन सा आराम करती हूं घर में ! 24 घंटे लगी रहती हूं कोल्हू के बैल की तरह!"
"यार, बहस मत करो। समझा करो! "

ऑफिस से आने के बाद तो उनके पास वैसे ही टाइम नहीं।   संडे वाले दिन तो इनसे वैसे ही उम्मीद रखना बेवकूफी है।
बाय गॉड लॉकडाउन ने तो फिर से हमें, हमारा वही खोया हुआ सहयोगी पति लौटा दिया।
वैसे लॉक डाउन की घोषणा सुन। उन्होंने भी घर में घोषणा कर दी थी कि अब मैं खूब आराम करूंगा। कोई मुझे तंग नहीं करेगा। लेकिन आराम या सोना भी कोई कितने घंटे कर सकता है। चौबीसों घंटे‌ तो कोई सो नहीं सकता।

जनाब सो कर, टीवी देख, फोन पर बातें कर, बालकनी के चक्कर काट, सब तरह से 2-3 दिन में ही  थक गए। अब तो कभी मेरे साथ कुछ करवाते हैं। कभी बच्चों के साथ खेलते हैं । हां रामायण, महाभारत व शक्तिमान देख फिर से अपना बचपन जी रहे हैं हम सब। इस लॉकडाउन ने हमें कुछ परेशानी दी है तो कुछ खूबसूरत पल भी दिए अपनों के साथ बिताने के लिए।
सरोज ✍️

Hindi Story by Saroj Prajapati : 111412510
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