प्रेम है अद्वैत की प्रतीति, प्रेम है अस्तित्व के नृत्य में उतर जाना, ईश्वर की नियति में खुद को समर्पित कर देना ।
प्रार्थना की दिशा में जो आखरी कदम है वह प्रेम है । प्रेम वो है जहां दो की गिनती मिट जाती है, एक से आगे गिनती रुक जाती है, उस एकत्व का भाव ही प्रेम है ।
जैसे दो दिए दूर दूर जलते हो और दोनों का प्रकाश एक दूसरे से मिल गया हो । प्रेम है आकार से ऊपर उठ जाना, और निराकार में प्रवेश हो जाना । 🙏
Anil Mistri🙏🙏