मे और मेरे अह्सास
आंख से छलकती हुई बारिस पीनी है मुजे l
साथ से छलकती हुई बारिस पीनी है मुजे ll
हस्ते खेलते बिताए हुई मनमोहन पलों की l
याद से छलकती हुई बारिस पीनी है मुजे ll
चांदनी छलक रही हो आकाश से हरतरफ उस l
रात से छलकती हुई बारिस पीनी है मुजे ll
दर्शिता