(कोरोना) अवकास
............................
"जीवन भर चिन्ता की तुमने ,
यह वक्त है चिन्तन करने का|"
"चिन्ता तो चिता सजाती है,
चिन्तन आगे ले जाती है|"
"मौका न मिलेगा फिर तुमको,
खुद के अन्दर यूँ रहने का|"
"एक सत्य प्राण भी है अन्दर,
उसको पोषित यूँ करने का|"
"अब तक रहते थे जिस घर मे,
वह चार दिवारे छत से ढकी |
"अपने अन्दर भी एक घर है,
मौका है उसमे अब रहने का|"
"जीवन पाया है तुमने क्यो!
इसको अब तक क्या जाना है|"
"दो धन्यवाद !यह समय मिला ,
न मिलता तुम ले सकते थे?"
"एक क्षुद्र तन लिए ,सेते हो,
सोचो इससे क्या पाना है|"ruchi