कुछ मार्मिक दृश्य देखे होंगे आपने,
एक पिता जब अपने घर वापस आते हैं तो किस तरह से उनके नन्हे-नन्हे बच्चे दौड़ते हुए आते हैं, और अपने पापा को गले लगाना चाहते हैं।
मगर पिता अपने बच्चे को इशारे से दूर रहने को कहते हैं। और कभी पॉलीथीन से ढक कर या कभी काँच के दूसरी और से उन्हें प्यार करते हैं।
अपनी भावनाओं पर अपने आँसुओं पर नियंत्रण करना चाहते हैं, मगर जब नहीं कर पाते तो रोने लगते हैं,
ऐसी भी माँ हैं जो महीने भर से अपने बच्चों से दूर हैं, चाहते हुए भी नहीं मिल पा रहीं।
ऐसे ना जाने कितने ही लोग हैं जो अपने परिवार से घर से अपनों से दूर हैं, सिर्फ और सिर्फ हमारे लिए।
और एक दृश्य वो भी था जिसमें इन्हीं लोगों के साथ मारपीट की जा रही है, इन पर पत्थर फेंके जा रहे हैं, बद्तमीज़ी की जा रही है, अपशब्द कहे जा रहे हैं।
मगर ये लोग कौन हैं??
ये लोग हैं हमारे देश की पुलिस, डॉक्टर्स, और भी ना जाने कितने छोटे बड़े कर्मचारी।
कितना मजबूत दिल होगा इनका जो ये रोज मौत के मुँह तक जाते हैं सिर्फ इसलिए कि हमारे जैसे आम नागरिक सुरक्षित रहें और घर पर रहने में हमें कोई समस्या ना हो।
लेकिन हम सभी क्या कर रहे हैं..?
हम इनकी समस्या बढ़ा रहे हैं, घर से बाहर निकलकर.. और वो भी बिना किसी मास्क या ग्लव्स के।
जबकि तब, जब हम इस वैश्विक बीमारी के परिणाम जानते हैं।
क्या हम लोग इतने कमजोर हैं कि अपने ही देश के लिए, अपने परिवार के लिए और खुद अपने लिए घर पर नहीं रह सकते।
कितनी अजीब बात है आप घर पर रहने में इतने परेशान हैं तो सोचिए वो जो सीमा पर बिना किसी सुविधा और बिना किसी अपने के रहते हैं, वो किस तरह रहते होंगे।
आपको केवल घर पर रहना है, अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करना है। हर एक सुविधा है आपके पास आपका समय व्यतीत करने के लिए।
आप इसे सकारात्मक रूप में लेकर देखिए,, आपको मौका मिला है अपने व्यस्त जीवन से कुछ पल अपनों के साथ बिताने का, उनसे बातें करने का, कुछ प्यारे पल संजोने का।
साथ ही अपना और अपनों का ख़्याल रखने का।
इसलिए घर पर रहें, सुरक्षित रहें।
क्योंकि आपके घर पर रहने से सिर्फ आपका नहीं बल्कि पूरे देश का भला होगा।
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