प्राणों मे भरती पीड़ा सी , एक विकल रागिनी वीणां सी.
जिव्हा पर ,चित्कार लिए ,चित्त मे, हा हा कार लिए.
एक काल करोना आया है. मुँह बाये फैलाये ऐसे मानो सबको खा जायेगा ,अब विश्व प्रलय आ जायेगा.
आँधी न हवा चली कोई , सागर भी शान्त सरल सा है
यह प्रकृति का है रूप नया हो कुपित शाप बन आई है .
यह कैसी विपदा आई है, अब,विश्व धरा थर्राई है, यह विश्वधरा थर्राई है.ruchi
#विश्व