इन्सानो से बेहतर होते है जंगली जानवर जो भूख होने पर ही मारते है,भूख भर ही खाते है ,माँसाहारी केवल माँस ही खाता है शाकाहारी कभी माँस नही खाता . इन्सान सब खाकर भी संतुष्ट न हुआ उसकी श्रुधा बढ़ती जा रही है. जीव-जन्तु,जानवर उसने कुछ न छोड़े. यहाँ तक था तो भी ठीक था .बात कुछ अौर आगे बढ़ रही है जो प्रकृति को ही निस्ते-नाबूत कर रही है. ये सिलसिला न जाने कहाँ जाकर रूकेगा .छोटी सी कोठरी (पेट)को भरने के ये लिए अनगिनत पकवान दिये जिस माँ ने, खाकर पहलवान हुए अहंकार से ही भर गये. खुद से छोटा समझने लगे सबको. छीन लिया अधिकार जीने का जानवरो से ,प्रकृति का संहार करने लगे .अंधा हो रहा है मानव जाने क्या पाने के लिए ,वृक्ष की जिस डाल पर बैठा है उसकी जड़ो को ही खो रहा है. ऐसा लग रहा है मानो विनासकारी बुद्धि से मानवता खो मानव जंगली जानवर, और जंगली जानवर जानवर तुलनात्मक श्रेष्ठता लिए मानव मे परिवर्तित हो रहा है.
#जंगली