My Painful Poem...!!!
नसीहतें दे कर ये वक़्त भी गूजर जाएगा
इन्सानी बर्दाश्त-ए-हदसे गूजर जाएगा
सिमटकर चले आए सारे दु:ख दर्द बस
किसे थी खबर लाखों जाने ले जाएगा
एक अदना-सा कीटाणु यूँ मार जाएगा
चलते फिरते कदम यूँ क़ैद कर जाएगा
बहती आँखों में अश्रु-ए-तूफ़ान लाएगा
सिसकती कराहती जानें बहा ले जाएगा
कोन बचा है इसकी कातिल लपेटों से
जहाँ का ज़र्रा ज़र्रा रेज़ा रेज़ा थर्रा थर्रा
काँपता हैं,जाने कितनी जाने ले जाएगा
प्रभुजी ही मसीहा है इन्सानी नस्लों का
जाने ओर कितना कष्ट ये दे के जाएगा
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