***आर्थिक बहिष्कार बनाम आत्मनिर्भरता***
मुझे क़बीलों की एक बात बहुत पसंद है वो यह कि सभी क़बीले खुद कफील हुआ करते थे। मतलब हर कबीला अपने ज़रूरत की हर चीज़ खुद बनाता था जिससे कि दूसरे पर निर्भरता नहीं होती थी। वे आत्मनिर्भर होते थे। उनके अपने क़बीले में दर्ज़ी, मोची, कसाई, सब्ज़ी-फल विक्रेता, लोहार, सुनार, तेली सब होते थे जिससे उनमें आपस में इत्तेहाद होता था और सब एक दूसरे की अहमियत को समझते थे।