आश्चर्य ! तू ही तो है माँ के गर्भ मे स्थापित हो
उसके मुख से जो पोषित होता.
फिर बाहर आ बचपन जीता ,फिर खो देता, युवावस्था की तरूणायी मे साहस एक संजो लेता, अाश्चर्य तू ही तो है!!
स्वेत चाँद सी चमक लिए सिर पर अब, "प्रौढ़ "ऊर्जा खोता सा हे आश्चर्य ये तू ही तो है!!
झुककर चलता लाठी के बल खोता सामर्थ्य हर दिन हर पल हे !आश्चर्य ये तू ही तो है.
साँसो की पूँजी खोकर भी मिटता न कभी जो तू ही है आरम्भ से ले ,प्राणान्तक मे केवल तू ही तू जीवन मे.
खुद मे खुद का ही अर्थ लिए एक प्रश्न समेटे तू ही तू ,जो बूझे वो खोता तुझमे, हे !अश्चर्य तू ही तो है.
मिटते सारे मिटता न कभी,अस्तित्व तेरा, बस तू ही तू हे! आश्चर्य केवल तू ही तो है.ruchi
#आश्चर्य