सोचो कि सबका एक ही रंग हो
सबकी सूरत भी एक हो
एक ही नाम और एक ही ढंग हो
जाति, धर्म, सब एक हो
ना हो दिन रात, न ही बदले ताप
मौसम में एक सी गर्मी हो
फसले, खेती जैसे सारे एक ही हो
क्या हो जब सब एक ही हो
सारा जग नीरस हो जाएगा
विभिन्नताओं का मज़ा खो जाएगा
भिन्न भिन्न है स्वाद तभी,
भिन्न भिन्न है भाषा बोली
पृथ्वी का आकार भिन्न है,
विभिन्नताएं दिया है ईश्वर ने
फैला के झोली
विभिन्न अवस्थाओं से भरा जीवन
जर्जर बुढ़ापा, प्रौढावस्था, शैशव, बचपन
विभिन्न है व्यक्ति और भिन्न भिन्न उनकी शक्ति
विभिन्न पुष्प की सुगंध भिन्न है
विभिन्न पक्षियों की भिन्न है वाणी
विभिन्नताओं में रचा बसा है संसार
विभिन्नताओं से ही होता सारा व्यवहार
#विभिन्न