कोरोना...
एक सूक्ष्म अदृश्य दानव
चुपके से घुस गया मानव के भीतर
और
सवार हो आदम के अंदर
बिन डैनों के उड़ने लगा
बिन पैरों के भागने लगा
घूमने लगा सर्वत्र
फैलने लगा सभी ओर
एक शरीर से दूसरे शरीर
एक घर से दूसरे घर
एक शहर से दूसरे शहर
एक देश से दूसरे देश
एक सागर तट से दूसरे तट
एक द्वीप से दूसरे द्वीप
एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप
दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर
ये पूरा विश्व, सारा विस्तार
कितना छोटा, कितना अदना
सा लगने लगा है
मानो सारी पृथ्वी ही सिमट गई हो
इस अदृश्य विषाणु के पाश में
इसने विषाक्त कर दिया है
सारा संसार ..
लोग डरने लगे हैं -
पास आने से एक दूसरे के
डरने लगा है इंसान इंसान से
कि पता नहीं किसके भीतर छुपा
बैठा हो वह शैतान
लेने को अपने शिकंजे में
एक नया शिकार
एक नया आदम शरीर
इस राक्षस को पनपने के लिए
खुद को ज़िंदा रखने को
चाहिए घर - हां एक मानव घर
ये नरभक्षी विषाणु नर्तन कर रहे हैं
नर तन के भीतर भर अपना विष
और तलाश में हैं नव नर तन की
अपने प्रसार के लिए
खुद को ज़िन्दा रखने के लिए
इससे मिलकर लड़ने के लिए
सभी जन अलग हो गए हैं !
इसके कहर से आज़ाद होने के लिए
सभी जन कैदी हो गए हैं
अपने अपने घरों में
बंद दरवाजों के पीछे !
ये विषाणु कहीं पास ना आ जाए
इसलिए दूरी बना ली है
लोगों ने आपस में !
ये विषाणु थाम रहा है
कुछ की श्वास को
मार रहा है कुछ शिथिल शरीर
पर मानव मन सर्वत्र ही
एकजुट हो गया है
एकमत हो गया है
जुड़ गया है एक दूजे से
इस शातिर सूक्ष्म विषाणु से जंग को
इसे कमज़ोर करने के लिए
इसे हराने के लिए
जीतनी होगी हमें
अपने भीतर की जंग
बनाने होंगे अपने भीतर के
किले ज़्यादा मजबूत और अभेद
और यूं कट कर एक दूजे से
काटनी होंगी इसके फैलाव की
सारी कड़ियां - एक एक कर