उन बातों को माने जो बातें हो मतलब और काम की...
जो बातें बेकार की हो उनको कर दें विराम की...
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
अनोखीदवा -/+/अच्छाई और सच्चाई की बुराई की, जन सेवा और भलाई की, ब्रह्मदत्त
सच्चाई के फूल केवल 5 ग्राम ताजे और विनम्रता के फूल 5 ग्राम ताजे
आवश्यक सामग्री
ईमानदारी के पत्ते केवल 3 तोला ताजे
मिलनसारिता के आंवले केवल आधा किलो-500 ग्राम वह भी ताजे
संगठन का दूध उमाशा जो ताजा ताजा हो
वाणी की मिठास केवल मात्र200 ग्राम तुरंत पेड़ से तभी टूटनी चाहिए
परोपकार की जड़ केवल मात्र30 ग्राम वह भी ताजी और स्वच्छ हो
सत्संग का जल जितना भी आप उचित समझे या इच्छा हो आवश्यतानुसार इसको आप डाल सकते हैं
शांतिप्रियता की छाल केवल 5 तोला वह भी ताजी-ताजी होनी चाहिए
स्वदेश प्रेम और/ ईश्वर प्रेम का रस बनाने की विधि
आधालीटर 500ग्राम जुनून के पानी में इन सभी को एक साथ डाल दें
ऊपर बताई हुई आवश्यक सामग्री को मिलाकर परमात्मा रूपी आग पर इसको पकने दें
तपेले में भक्ति का शुद्धघी विश्वास की शुद्ध रूपी लकड़ी डालकर प्रेम के चुल्हे पर ध्यानरूपी आग पर तब तक पकाते रहें जब तक इसका चौथाई भाग /लोभ लालच पाप क्रोध मद लोभ मोह, जलकर खत्म ना हो जाए
अग्नि पर अच्छी तरह पक जाने पर ठंडा कर शुद्ध मन
के पवित्र कपड़े से छानकर मस्तिष्क रूपीशीशी में रखे।
सेवन की विधि
इस दवा को रोज प्रात: संतोष रूपी गुलकंद/मिलन रूपी चवनप्राश के साथ इंसाफ रूपी चम्मच से 13 ग्राम प्रतिदिन सेवन करें। अद्भुत एवं अत्यंत ही लाभदायक परिणाम आपके सामने आएंगे- ब्रह्मदत्त
कुछ विशेष बातें यहां पर परहेज की भी की जाए तो ज्यादा अच्छा है ,क्योंकि हर दवा में परहेज एक महत्वपूर्ण होता है -ब्रह्मदत्त
परहेज के आवश्यक पहलुओं पर ध्यान दीजिए
क्रोध की मिर्च, अहंकार का तेल, लोभ का पापड़, धोखे का नमक चापलूसी का जीरा और गद्दारी की प्याज, क्योंकि प्याज जब कटती है तो,झल पैदा कर देती है वह आंखों को आंसुओं से तर कर देती है , विशेष एक और सावधानी, अत्यचार एवं दुराचार के अचार से बचें।
विशेष सूचना इस दवा की एक और खास बात यह है इस दवा के सेवन के बाद आप-जो भी कार्य करेंगे, आपके समस्त समाज के प्रति, एक नई दिशा एवं नए समाज का निर्माण करेंगे, समाज को आप सच्चाई और अच्छाई प्रदान करेंगे -ब्रह्मदत्त
दवा सेवन के बाद कुछ समय नैतिकता रूपी दूध पिये और अटल मक़सद रूपी बादामों का प्रयोग करें
स्नेह रूपी शहद लेने से और ज्यादा लाभ प्राप्त होगा, स्वाध्याय (शास्त्र अध्ययन) करें। यह सब करने पर ईश्वर भगवान अल्लाह वाहेगुरु से आपको ऐसा रामबाण इलाज एवं आशीर्वाद प्राप्त होगा कि आप जीवन में किसी के आगे नहीं झुकेंगे और ना ही किसी को झुकाएंगे, और ना ही किसी को किसी के आगे झुकने देंगे यही आपकी सभी दवाओं से अच्छी दवा कहलाएंगी
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़