किसी ने लिया आज नाम उनका तो
हमें याद वो अपनी मुलाक़ात आ गई
ज़िन्दगी के सबसे हसीन लम्हों की
रोशनी ज़हन में चारों ओर फिरसे छा गई
वो शख्स जब हुआ था रूबरू पहली बार हमसे
कुछ इस तरह ज़हन में मेरे बहार आ गई थी
ज़िन्दगी में आखिर हसीन वो शाम आ गई थी
था जिसका इंतज़ार सदियों से
शख्सियत मानो आज मेरे रूबरू आ गई थी
जमीन पे जैसे मानो कायनात आ गई थी
हवा में उसकी मीठी महक सी छा गई थी
इन होंठों पे भी हल्की सी मुस्कुराहट छा गई थी
ज़िन्दगी में मेरे जब वो खुशनसीब आ गई थी
राहों में भटकते हुए में निकला था ढूंढ़ने,
लेकिन मंज़िल खुद ब खुद
जैसे आज मेरे पास आ गई थी
लोग रातो में ढूंढ़ने निकलते थे उस चांद को
लेकिन किस्मत तो देखिए
चांदनी जैसे आज खुद चल के मेरे पास आ गई थी
-Jaydip Solanki
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#નરમ