सूरज और चांद भी सुबह शाम जाकर कही कोने में छिप जाते है,
और जो खुद नहीं पहुंच पाए कभी मंजिल पर वो मुसाफिरों को मंजिल के रास्ते दिखाते है,
और जिन्हे मोहब्बत की समझ ही नहीं वो हमें मोहब्बत समझाते है,
ज़रा कोई बताए इन्हे हम शायर है , हम लोगो को मोहब्बत पड़ाते है,
साथ अगर होता कोई हमसफ़र तो बांट लेते दूरियां,
पर ये राहों पर चलते लोग क्या समझेंगे #Nothing तेरी मजबूरियां।
#NOTHING .🤫🤫