लाऊ कहाँ से वह सच जो दिखाई भी कभी कभी पडता है,
और छुपने की हर मुमकिन कोशिश करता है
उघाड उघाड कर हर कोइ देखना चाहता है उसे - - -
- - लेकिन सब्र से अपनी आंखे बंद रखता है
और गूंगे कुछ बोलते नही ऐसी शिकायते बहरो से करता है,
इबादत का ही इल्म हासिल किया उसने - - -
- - फिर भी पुछ्ता है तू किसकी इबादत करता है
ठीक है यह कि तु गैर होकर भी मेरी ज़ान की फिकर करता है
आलम यह है कि वो जबाँ मे छूरी सी धार रखता है
जबकी वो देख-देख कर ही हलाल करता है
जिन के खुद क़े जज्बात हीं हो मुखालिफ
वो कैसे दूसरो कि ख़बर रखता है
कही जिंन्दगी सो ना जाये कब्र मे
सच की ख्व्वाहिशे लेकर
कि हर नयी पैदाइश वक़्त की ही पैमाइश करता है
#षणानन