परिंदे भी जब उड़ते हैं तो पंख फैलाते हैं
और फिर पंख फड़फड़ा ते हैं
फिर कुछ देर बाद रुक जाते हैं
लेकिन हम इंसान कुछ पाने की आस में
इतना दौड़ते हैं उड़ते हैं भागते हैं
कि जो सफलता मिलती है
उसे पाने का एहसास नहीं कर पाते
और जब समय चला जाता है
तो फिर अपने आप को ही कोसते हैं
हमें भी इन परिंदों से यह सीखना चाहिए
कि भले ही कितनी ऊंचाई पर पहुंच जाए
पर बीच में खुशी का एहसास करना चाहिए
बिंदु अनुराग