सभी आलोचकों को संदेश
मैं जानता हूं कि जब में रात को बालकनी में आकर दिया जलाऊंगा, तो उससे ये वायरस नहीं मरेगा
>पर वो में जब अंदर सोफे पर बैठकर नेटफ्लिक्स देख रहा होऊंगा तो उससे भी नहीं मरेगा
मैं जानता हूं कि मेरे बालकनी में दिया जलाने से देश में हॉस्पिटल की संख्या नहीं बढ़ जाएगी
>पर वो तो मेरे बेड पर लेटकर सरकार को गाली देने से भी नहीं बढ़ जाएगी
मैं जानता हूं कि मेरे बालकनी में दिया जलाने से बाहर ड्यूटी कर रहे लोगो को सुरक्षा वाले इक्विपमेंट नहीं मिल जाएंगे
>पर वो तो मेरे रोज डाइनिंग टेबल पर बैठ कर केएफसी और डोमिनोज़ को मिस करने से भी नहीं मिलेंगे
मैं जानता हूं कि मेरे बालकनी में दिया जलाने से देश को पैसा नहीं मिल जाएगा
>पर वो तो मेरा रोज अपने लैपटॉप के सामने बैठकर सिर्फ अपनी सैलरी के बारे में सोचने से भी नहीं बढ़ेगा
फिर क्या होगा इन लम्हों से ,
१. इन चंद लम्हों से बालकनी में आए हर बच्चे हर बूढ़े हार हारे हुए इंसान को एक हिम्मत मिलेगी की जंग अभी जारी है,अपनी जीत की बारी है
२. हर बाहर ड्यूटी करते हुए सिपाही,हर डॉक्टर,हर कर्मचारी का जोश बढ़ेगा की जान बेशक हथेली पर लेकर वो बाहर है। लेकिन अंदर बैठा हर शख्स हर पल उनके लिए दुआ कर रहा है ।
३. भारत से छोटे और भारत से बड़े हर उस देश को हिम्मत,ताकत मिलेगी की एक ऐसा देश जिसकी जनसंख्या सबसे ज्यादा,हॉस्पिटल और बाकी सुविधाएं सबसे कम लेकिन उस देश का हर नागरिक खड़ा है आज कंधे से कंधा मिलाकर उस अनदेखी मौत के सामने और उसको चुन्नौती दे रहा है कि हम तुझको हराएंगे,हम दूर है पर आज भी एक है। और अगर मौत आखिरी मंजिल है तो तेरा स्वागत है, हम सब साथ है
४. और उस जलते प्रकाश से हमारी अंतरात्मा को पता चलेगा की बेशक आज अंधेरा घना है लेकिन प्रकाश का आना तय है और ये छोटा सा प्रकाश उस अनदेखी ताकत को बता रहा है की मैं आकर रहूंगा
विज्ञान बोलता है कि हमारी इम्यूनिटी ही एक मात्र चीज है जो इसको हरा सकती है।
और कौन कहेगा कि एक हंसते हुए इंसान की इम्यूनिटी पहले से हार मान चुके इंसान से ज्यादा नहीं होगी।
ये हिम्मत ही है जो लाइलाज को भी वापस जीवन की पटरी पर ले आई है।
और आज यही हिम्मत तो एक दूसरे को देनी है बस, इतना सा ही तो करना है।
मैं तो करूंगा,इंतज़ार सबका रहेगा, गिला किसी से नहीं
#आज #9बजे#9मिनट
🙏🙏