किसी के अधीन रहकर जिस प्रकार लेखक सृजन नहीं कर सकता,ठीक उसी प्रकार एक व्यक्ति का विकास भी किसी के अधीन रहकर नहीं हो सकता। एक बच्चे को बन्द कमरे में रखकर विकास की कामना की जाती है,पर शायद वह बन्द करने वाला व्यक्ति यह भूल जाता होगा कि आज वह जिस भी मुकाम पर है वह बन्द कमरे से नही बल्कि उन्मुक्त गगन में फिरने से है।
~सिद्ध साहित्य