हमें अपनी सुप्त परिपाटी को पुनः जागृत करना ही होगा। प्रकृति की भी यही पुकार है कि है सृष्टि के जीवों तुम्हे वर्षों बाद यह सुनहरा मौका दे रही हूं, भूल सुधार कर लो। वरना अब तुम्हे बचाने वाला कोई नहीं होगा।उस दौर में प्रथम पूज्य गणेश भगवान ने भी अपने प्रथम आने का सार यही बताया था कि अपने मां बाप ही हमारे आरंभ और अंत है। आज यह बात अनिवार्य रूप से सोचनीय व विचारणीय है।