पल पल अकेले ना कटे यह जिंदगी ,
परछाइयों के पीछे चले ना यह जिंदगी ।
हर आहट में उनको ढूंढते रहते हैं ,
फिर एकाकी में खुद ही घुटते रहते हैं ।
जीवन के उस दोराहे में खड़े हैं ,
जहां सबके बीच में होके भी हम अकेले खड़े हैं ।
पल, पल उस आसमान को देख काट रहे हैं ,
अपनेपन को अकेला ही ढूंढने चले हैं ।
हर समझ से विफल हो रहे हैं ,
आह से भरी जिंदगी को , काट जो कैसे रहे हैं जो कभी मेहमानों का इस्तकबाल कर आंखें चमकती थी ,
आज अकेलेपन की गहराइयों में खुद को ढूंढने चली हैं ।
उस नभ को एक तक ताक रहे हैं ,
उड़ते हुए पंछियों की आवाज सुन रहे हैं ।
जो सुनहरे आसमान में पंख फैला जा रहे हैं ,
अकेलेपन को काटने में पल-पल मददगार हो रहे हैं ।
आज आफताब की रोशनी में मेहताब भी रोशन हुआ है ,
मेरे दिल के आशियाने को देख यह कह रहा है ।
तो फिर उठ प्रज्वलित हो ,
इन तन्हाइयों को काट , फिर स्वइच्छा से स्वाबलंबी हो ।
पंख अपने फड़फड़ा ,
रोशन कर दे अंधेरे में यह आसमान ।
#Sentiment