My Painful Poem...!!!
कोई पुछ ले वजह इतने
भी यूँ उदास रहा न करो
दिल में करो याद हाल
पर चेहरे से बयां न करो
कि चलती हवा भी पोंछ
रही है अश्क रुक कर
राज़-ए-उल्फ़त सरेआम
आँखों से यूँ रवाँ न करो
हस्ती-ए-कश्ती खाँए
हिचकोले मद्धम मद्धम
रह-गुजर काँटों भरी ही
सही सफ़र ज़ाया न करो
रब जानत है सब तेरे फ़न
व तेरे बर्दाश्त-ए-ज़ख़्मों
की इनतेहाँ-ए-ज़ब्त देता
उतना ही दर्द, सर्द न करो
होगा तो होगा आख़िरी में
क्या होगा बस वही होगा
जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होगा
गिला शिकवा यूँ न करो
कट ही जाएगा यह वक़्त भी
कटते कटते गुजरते पलो को
कर्राहट-ओ-दहशतगर्दी से
बिलावजह यूँ रुसवा न करो
ग़म कैसे भी हो दिल में पर
चेहरे से हंसी हटाया न करो
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