रेत पर बना रही थी मका
तभी लहरों का उफान आया
मेरा मकान ढह गया
मैं अवाक रह गया
तुमने यह क्या किया
लहरों से मैंने प्रश्न किय
कभी लहरों ने कहा
मैं तो सतत बहती रहती हूं
मेरा कोई मंसूबा ना था
परंतु कहूंगी मैं कुछ
मानव चाहता है कुछ
और हो जाता है कुछ अलग
इसमें कुछ किसी का नहीं दोष
मनुष्य करे न कोई संघर्ष
अगर वह पढ़ ले अपना भविष्य
इसलिए कह रही हूं
आज मैं जियो
कल की ना सोचो
अगर ढह गया तेरा मका
तो फिर ले बना
एक बात ले समझ
नियति ही रानी है
बाकी सब कहानी है
#रानी