किसका है दोष
हिन्दू का या मुस्लिम
कभी कबीर तो रसखान
को मैंने पढ़ा तब यू
ना था लगा के ये अलग
धर्म के है ये सब का एक
था संदेश खुदा या दयासिंधु
है एक रब को करो
पूजा करो मंदिर में
चाहे रखो रोजा
अल्ला हो राम
लेकिन नहीं अंधभक्ति
के गुलाम आज क्या
हो रहा कुछ अल्ला
कुछ राम की लड़ाई
लड़ रहे वहीं राजनेता
साध रहे स्वार्थ
मुझे रसखान और कबीर
है प्रिय लेकिन उनकी
अगर समय रहते है ली
सीख तो दिन ना दूर रहा
जब एक मंजर आएगा
हिन्दू और मुस्लिम की
लड़ाई मे सियासत
की होगी जीत कोई
ना रखेगा सिर्फ रह
जाएगी मानवता हार
कबीर की बात करू
तो वो जाते जाते दे
गए संदेश दिया
चादर पर मिले दो
फूल कहा बाट को
ना करो लड़ाई
मुस्लिम और आपस
में ना करो बैर
कोई धर्म नहीं सीखता
वैसे ही गोस्वामी तुलसी
ने लिखा
सरिस धर्म नहिं भाई।
परपीड़ा सम नहीं अधमाई
#रानी