मन में आते है कई प्रश्न
खुदा ने ये दुनिया बनाई
चलो बनाई तो सही परंतु
मुझे अब उससे लेकिन गिला
मेरी है एक उनसे इल्तज़ा
ये एक चेहरे पर भोला
दूसरे पर रखते नकाब
ये तो बेबुनियाद थी
मुझे चे हरा पढ़ना
नहीं आता मै तो
बस जानती हूं वेदना
कर लेती हूं विश्वाश
लोग वेदना की आड़ में
मुझे ठग लेते है
कल थी जहां खड़ी
आज भी वही
मेरी एक आरज़ू
है या तो वेदना
को से मिटा या
मुझे चेहरा पढ़ने
का तिलस्मी इल्म
#सवाल