हम क्या किसी को मूर्ख बनाएंगे, ये ज़िन्दगी हर वक़्त हमें मूर्ख बनाती रहती है! दिखाती तो है सपने बहुत, पर उन्हें सपने ही रहने देती है!
ज़िन्दगी में गर ज्यादा भरोसा किसी पर कर लिया, तो वो हमें मूर्ख समझने लगता है; सोचता होगा वो भी, इतना भरोसा आजकल कौन करता है!
सब बनते रहते हैं, एक दूसरे से मूर्ख; फिर भी खुद को महान समझते हैं, भूल जाते हैं हम इंसान, मूर्ख तो हमें रब बनाया करता है!