पैसा, जमीन-जायजाद जीवन-व्यापन के तरीकों को बेहतर बना सकती है, पर जीवन को नहीं। पद और अधिकार अहं पैदा करते हैं, जिससे जीवन दूषित हो जाता है। शिक्षा हमारी समझ को बेहतर बनाती है, पर साथ ही वह हमें शातीर बदमाश भी बना सकती है, जिससे जीवन बद्तर हो जाता है। फिर प्रश्न उठता है कि वह क्या है जो मनुष्य को व उसके जीवन को बेहतर बनाता है? कहीं यह धर्म तो नहीं है?
..... भूपेन्द्र कुमार दवे