आज बेसहारा हु में
पर कब बोला तू बाहर निकल
में बैठा हूँ तेरे आंगन में
तू खुद आया लेकर कुछ खाना
बात फैलादी गावो में
क्या खूब उड़ाई हँसी तुमने
मेरी मजबूरी देख कर
देकर निवाला रोटिका
तस्वीर खींच तुम जाते हो
मत बन इतना जूठा तू
कब बारी तेरी आएगी
कर याद तुम इन तस्वीरों को
खुद ही मन मे पछताओगे
कुछ कर ना सको अगर तुम
दिखावा तुम मत करना
एक प्यारी सी मुस्कान से
में केसा हु पूछ जाना तुम
में हर जन से बस इतना चाहू
जूठी हमदर्दी दिखलाना मत
एक प्यारी सी मुस्कान चाहिए
में केसा ह पूछ जाना तुम
कुछ लाइन उन लोगो के लिए जो अपने घरों की ओर जा रहे और कुछ लोग सस्ती पब्लिसिटी पाने में जुटे हुवे है।