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पूरे ना हुए उस हर एक ख़्वाब से शिक़ायत है।
बिन मांगी ये उम्र की बारिश से शिक़ायत है।
बिना चेतावनी आए उस बचपन के आखरी दिन से शिक़ायत है।
इतनी दरखास्त के बावजूद नहीं रुकने वाले उस वक्त से शिक़ायत है।
नादानियों पर गलतियों की मोहर लगाने वाले समाज से शिक़ायत है।
मेरे गिरने पर की गई उनकी हर एक मुस्कान से शिक़ायत है।
कमज़ोरी का अहेसास करने वाले हर एक अश्क से शिक़ायत है।
और दफ्तर- ए- शिक़ायत में लगी इस भीड़ की शिक़ायत है।
श्रद्धा