मन वर्तमान में नहीं रहता। वह भूतकाल के कचरे में व भविष्य के ख्यालों में डूबा रहता है। इसलिये वह सभी दुखों की जड़ साबित होने लगता है। मन में भूत व भविष्य की हलचल बनी रहती है। क्या हुआ और क्या होगा, उस चिन्ता में वह कसमसाता रहता है। मन सदा व्याकुल रहता है और मस्तिष्क को भी चिंताग्रत बनाये रखता है। मन पूर्वाग्रह से ग्रसित बना रहता है, फलतः नकारात्मक द्दष्टि बनाये रखता है। इस कारण वह पूर्ण सत्य को प्रकट नहीं होने देता।
..... भूपेन्द्र कुमार दवे