जब भी हम भविष्य की चिंता में डूबने लगते हैं या फिर भूतकाल में मँड़राने लगते हैं, तो भूल जाते हैं कि वर्तमान का कीमती समय हाथ से छूट रहा है। इस तरह समय की बरबादी कर हम वर्तमान व भविष्य दोनों को भूतकाल के कुंड में ढकेलने लगते हैं। हमें वर्तमान में जीने का सौभाग्य ही नहीं मिल पाता।
..... भूपेन्द्र कुमार दवे