ये चित्र भी विचित्र है
मनुष्य आज केद है, पंछीया आजाद है
बिगडा जो चरित्र है, प्रक्रिति सुधार देगी ,
पंछियो को उनका घर, फिर कुछ दिन उधार देगी
प्रकृति को नष्ट करने जो चल रहा था रात भर
दिन में ही थमा दिया एक ही दहाड़ पर
चेतावनी है मनुष्य , अपनी सोच को लगाम दे
प्रकृति का हिस्सा, प्रकृति के नाम दे
ये चित्र भी विचित्र है...
" नीरस " (004)
#चित्र