वक़्त वक़्त की बात है , या है नसीब का फेर
जिनके दिल में थे कभी , उन्होंने नज़रें लीं फेर
अब तो वे इस कदर बेरहम हो गए हैं
कि ख्वाबों में आकर अक्सर रुलाते हैं
उनकी तस्वीर बनाने को हम तरस जाते
ख्वाबों में भी क्यों अधूरे वे छोड़ जाते
उनकी तस्वीर भी हम पूरी नहीं कर पाते
#चित्र